8 अटल बिहारी वाजपेयी की कवितायें | Atal Bihari Vajpayee Poem In Hindi

टल बिहारी वाजपेयी(Atal Bihari Vajpayee) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के प्रमुख नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी गुरुवार 17 अगस्त 2018 को उन्होंने हमसे सदा विदाई ले ली । वह न सिर्फ देश के प्रधानमंत्री ही रहे बल्कि एक हिन्दी कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता भी थे । उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारतीय राजनीति में सक्रिय रहकर बिताया।
अटल बिहारी वाजपेयी की कवितायेँ atal bihari Vajpayee poem in hindi

अटल बिहारी वाजपई देश को मजबूत करकर गए साथ ही हमें वो सीख देकर गए जो एक पिता अपने पुत्र को देता है| अटल बिहारी वाजपई देश के सबसे प्रिय प्रधानमंत्री में से हैं| आज जब वो हमारे बीच नहीं रहे है तो उनकी यादे ही हमारे साथ रह गयी| अटल बिहारी वाजपई की कविताये(Atal Bihari Vajpayee Poem) उनमे से एक हैं| निडर लेखन उनकी प्रतिभा थी, चाहे किसी देश के विरोध में बोलना हो या देश के लिए अपनी प्रतिक्रिया के बारे में, उन्होंने हमेशा निडर होकर ही लिखा| सभी अटल बिहारी वाजपई की कविताओं (Atal Bihari Vajpayee Poem) के कायल हैं|
अटल बिहारी वाजपेयी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। वाजपेयी ने कई मुद्दों पर ऐसी कविताएं लिखीं, जिसे कोई भी पढ़कर प्रफुल्लित हो उठेगा। आज हम आपको बता रहे हैं उनके द्वारा लिखी हुई चुनिंदा कविता संग्रह के बारे में, जिन्हें आप जरूर पढ़ना चाहेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता | Atal Bihari Vajpayee Poem In Hindi

1: दो अनुभूतियां

-पहली अनुभूति
बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

पीठ मे छुरी सा चांद, राहू गया रेखा फांद
मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध जाता हूं
गीत नहीं गाता हूं

-दूसरी अनुभूति

गीत नया गाता हूं

टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती मे उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कुहुक रात

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूं
गीत नया गाता हूं

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा,

काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं
गीत नया गाता हूं| 
[next][post_ads]
2. कदम मिलाकर चलना होगा

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,
निज हाथों में हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

हास्य-रूदन में, तूफानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा.
क़दम मिलाकर चलना होगा.
[next][post_ads_2]
3. दूध में दरार पड़ गई

खून क्यों सफेद हो गया?

भेद में अभेद खो गया.
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई.
दूध में दरार पड़ गई.

खेतों में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंद
सतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है.
वसंत से बहार झड़ गई
दूध में दरार पड़ गई.

अपनी ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं ग़ैर,
ख़ुदकुशी का रास्ता, तुम्हें वतन का वास्ता.
बात बनाएं, बिगड़ गई.
दूध में दरार पड़ गई.
[next][post_ads]
4. हरी हरी दूब पर

हरी हरी दूब पर
ओस की बूंदे
अभी थी,
अभी नहीं हैं|
ऐसी खुशियाँ
जो हमेशा हमारा साथ दें
कभी नहीं थी,
कहीं नहीं हैं| 
क्काँयर की कोख से
फूटा बाल सूर्य,
जब पूरब की गोद में
पाँव फैलाने लगा,
तो मेरी बगीची का
पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा,
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूँ
या उसके ताप से भाप बनी,
ओस की बुँदों को ढूंढूँ? 
सूर्य एक सत्य है
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊँ?
कण-कण मेँ बिखरे सौन्दर्य को पिऊँ? 
सूर्य तो फिर भी उगेगा,
धूप तो फिर भी खिलेगी,
लेकिन मेरी बगीची की
हरी-हरी दूब पर,
ओस की बूंद
हर मौसम में नहीं मिलेगी।
[next]
5. मनाली मत जइयो

मनाली मत जइयो, गोरी 
राजा के राज में. 

जइयो तो जइयो, 
उड़िके मत जइयो, 
अधर में लटकीहौ, 
वायुदूत के जहाज़ में. 

जइयो तो जइयो, 
सन्देसा न पइयो, 
टेलिफोन बिगड़े हैं, 
मिर्धा महाराज में. 

जइयो तो जइयो, 
मशाल ले के जइयो, 
बिजुरी भइ बैरिन 
अंधेरिया रात में. 

जइयो तो जइयो, 
त्रिशूल बांध जइयो, 
मिलेंगे ख़ालिस्तानी, 
राजीव के राज में. 

मनाली तो जइहो. 
सुरग सुख पइहों. 
दुख नीको लागे, मोहे 
राजा के राज में.
[next]
6. एक बरस बीत गया 
  
झुलासाता जेठ मास 
शरद चांदनी उदास 
सिसकी भरते सावन का 
अंतर्घट रीत गया 
एक बरस बीत गया 

सीकचों मे सिमटा जग 
किंतु विकल प्राण विहग 
धरती से अम्बर तक 
गूंज मुक्ति गीत गया 
एक बरस बीत गया 

पथ निहारते नयन 
गिनते दिन पल छिन 
लौट कभी आएगा 
मन का जो मीत गया 
एक बरस बीत गया
[next]
7. क्षमा याचना
क्षमा करो बापू! तुम हमको,
बचन भंग के हम अपराधी,
राजघाट को किया अपावन,
मंज़िल भूले, यात्रा आधी।

जयप्रकाश जी! रखो भरोसा,
टूटे सपनों को जोड़ेंगे।
चिताभस्म की चिंगारी से,
अन्धकार के गढ़ तोड़ेंगे।
[next]
8. कौरव कौन, कौन पांडव
कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है|
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है|
धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है|
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है|
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है|

COMMENTS

इस पोस्ट से सम्बंधित कुछ लेख:

Name

अटल बिहारी वाजपेयी,1,आरतियाँ,2,कब्ज,1,घरेलू नुस्खे,9,चालीसा,4,डायबिटीज,1,पथरी,1,बवासीर इलाज,1,मोटापा,1,शरत चन्द्र,3,हिंदी कहानियाँ,2,
ltr
item
Khabar Only | ताज़ा खबर- न्यूज़ इन हिंदी: 8 अटल बिहारी वाजपेयी की कवितायें | Atal Bihari Vajpayee Poem In Hindi
8 अटल बिहारी वाजपेयी की कवितायें | Atal Bihari Vajpayee Poem In Hindi
अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ,Atal Bihari Vajpayee Poem In Hindi,अटल बिहारी वाजपेयी कविता संग्रह,कविता अटल हार नहीं मानूंगा,अटल बिहारी वाजपेयी कविता कोश,मेरी इक्यावन कविताएँ अटल बिहारी वाजपेयी,मेरी इक्यावन कविताएँ twenty one poems,हार नहीं मानूंगा कविता,atal bihari vajpayee
https://1.bp.blogspot.com/-1WMu_h0asi8/W3WnZA_4_II/AAAAAAAABMM/isoM5BSnzbcmOlHOcZgo3B7ibJjFVg7LgCLcBGAs/s640/atal%2Bbihari%2Bvajpayee%2Bki%2Bkavitaye%2BPoem%2Bof%2Batal%2Bvihari%2Bvajpayee.jpeg
https://1.bp.blogspot.com/-1WMu_h0asi8/W3WnZA_4_II/AAAAAAAABMM/isoM5BSnzbcmOlHOcZgo3B7ibJjFVg7LgCLcBGAs/s72-c/atal%2Bbihari%2Bvajpayee%2Bki%2Bkavitaye%2BPoem%2Bof%2Batal%2Bvihari%2Bvajpayee.jpeg
Khabar Only | ताज़ा खबर- न्यूज़ इन हिंदी
http://www.khabaronly.com/2018/08/8-atal-bihari-vajpayee-poem-in-hindi.html
http://www.khabaronly.com/
http://www.khabaronly.com/
http://www.khabaronly.com/2018/08/8-atal-bihari-vajpayee-poem-in-hindi.html
true
4086057271536295392
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy