मुसलमानों को बेवकूफ समझती है, झारखंड सरकार

 

सूफी महोत्सव आयोजन कर मुसलमानों को ठगने का कार्य

मोहम्मद शाहिद अय्यूबी 

रांची: झारखंड सरकार के पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग (सांस्कृतिक कार्य निदेशालय) द्वारा आयोजित सूफी महोत्सव 2022 का आयोजन एक सराहनीय पहल है लेकिन यह आयोजन कला संस्कृति भवन, ऑड्रे हाउस, राजभवन में होना चाहिए क्योंकि इस तरह के आयोजन अब तक ऑड्रे हाउस में ही होते रहे हैं। फिर अचानक ऐसे आयोजन हजरत कुतुबुद्दीन रिसालदार रहमतुल्लाह अलैह दरगाह, डोरंडा, रांची में करना उचित प्रतीत नहीं होता। यदि यह आयोजन ऑड्रे हाउस में किया जाता तो विभिन्न सम्प्रदाय के लोग इस समारोह का आनंद लेते और अपना मनोरंजन करते। लेकिन दरगाह परिसर में आनन फानन में यह आयोजन करने से कई समुदाय के लोग इस मनोरंजन से चूक जाएंगे। जब कलाकार चयन में धर्म जाति का बंधन नहीं रहा तो स्थल चयन में धर्म जाति का बंधन क्यों? वहीं, इस तरह के आयोजन झारखंड के मुसलमानों के राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान की गारंटी नहीं। 

मौजूदा सरकार में मुसलमानों से संबंधित कई योजना लंबित है, कई प्रकरण पर न्योचित कार्रवाई अधूरी है, बोर्ड, निगम, आयोग, न्यायाधिकरण आदि का पुनर्गठन अधूरा है, नियुक्ति बोर्ड में मुस्लिम प्रतिनिधि तक को शामिल नहीं किया जा सका है। पिछले तीन वर्ष से मुसलमानों से संबंधित कोई उल्लेखनीय कार्य सरकार ने किया हो तो उसे जगजाहिर किया जाये।

 ऐसे में संभवत करोड़ों रुपए खर्च कर सूफी महोत्सव का आयोजन कर मुसलमानों को ठगने का कार्य  प्रगति पर है। सरकार अपनी उपलब्धियों में इस महोत्सव की चर्चा अवश्य करेगी जबकि सर्वविदित है कि ऐसे आयोजनों से मुसलमानों का सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक उत्थान नहीं होगा। काश, सरकार सभी मतभेद भुलाकर झारखंड के मुसलमानों की एक बेहतर टीम बनाती और उनके परामर्श से मुसलमानों का उत्थान करती तो बात कुछ और होती। 

मोहम्मद शाहिद अय्यूबी

            अध्यक्ष 

झारखंड मुस्लिम युवा मंच

9431108511


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