सामाजिक नवनिर्माण के प्रति समर्पित हैं समाजसेवी सरवर आलम



रांची:, "अपने लिए जिए तो क्या जिए, ऐ दिल तु जी जमाने के लिए" उक्त पंक्तियों को हूबहू चरितार्थ कर रहे हैं रांची शहर के कोनका रोड निवासी युवा सामाजिक कार्यकर्ता सरवर आलम। अमूमन जिस उम्र में युवा अपने कैरियर के प्रति गंभीर रहते हैं, वहीं, सरवर आलम ने समाजसेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। गरीबों-जरूरतमंदों की मदद करना उनकी दिनचर्या में शुमार है। 

 श्री आलम बताते हैं कि समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें अपने आसपास के सामाजिक परिवेश और अपने माता-पिता से मिली। सरवर की प्रारंभिक शिक्षा हजारीबाग में हुई। उन्होंने जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। तत्पश्चात हजारीबाग स्थित आनंदा कॉलेज से उन्होंने कला संकाय में स्नातक की डिग्री हासिल की। हजारीबाग में उनके पिता मोहम्मद सरफुल सरकारी सेवा PTI ( पुलिस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट) में थे। रिटायर करने के बाद वे सपरिवार रांची आ गए। ग्रेजुएशन करने के बाद सरवर आलम ने रांची में जीवन यापन के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का कारोबार शुरू किया। लेकिन कतिपय कारणों से उनका कारोबार सफल नहीं हो सका।

 इस दौरान उन्हें समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की पीड़ा को काफी नजदीक से रूबरू होने का मौका मिला। गरीबों और जरूरतमंदों की परेशानियों को देखते हुए उनके दिल में समाजसेवा का जज्बा जागा। इसके बाद उन्होंने समाजसेवा को ही अपना ओढ़ना-बिछौना बना लिया है। 

 सरवर आलम ने गैर-सरकारी स्वयंसेवी संस्था सत्य भारती कोनका वेलफेयर सोसाइटी से जुड़कर समाजसेवा के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। विगत तकरीबन एक दशक से सरवर इस संस्था के अध्यक्ष हैं। संस्था के माध्यम से अपने सहयोगियों को साथ लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता बरकरार रखने की दिशा में सतत प्रयासरत हैं। वह शहर के मेन रोड स्थित इकरा मस्जिद शूरा कमेटी के सदस्य के रूप में भी जुड़े हैं।

 राजधानी में किसी भी धर्म और समुदाय के पर्व त्योहार के मौके पर स्वागत शिविर लगाकर सामाजिक समरसता बनाए रखने में सरवर आलम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 पैसे के अभाव में शिक्षा से वंचित बच्चे-बच्चियों को आर्थिक सहयोग देकर उन्हें शिक्षित करना, शिक्षा के प्रति उन्हें प्रेरित करना, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर स्वास्थ्य के क्षेत्र में लोगों को सहायता करना, गरीब परिवार के युवतियों की शादी-ब्याह में मदद करना आदि कार्यों को बखूबी अंजाम देने में सरवर आलम जुटे रहते हैं।

  इस नेक कार्य में उनके अभिन्न मित्र फहीम अहमद सहित अन्य निकटतम सहयोगी भी उनका साथ देते हैं। वह शांति समिति से भी जुड़े हैं। सामाजिक समरसता बरकरार रखने हेतु पर्व-त्यौहार के मौके पर जिला पुलिस-प्रशासन द्वारा आयोजित शांति समिति की बैठकों में भी उन्हें ससम्मान आमंत्रित किया जाता है। 

 विगत वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना काल में उन्होंने पीड़ितों की जो सेवा की, वह एक मिसाल के तौर पर स्थापित है। विभिन्न संगठनों और संस्थाओं द्वारा उन्हें कोरोना वाॅरियर्स के रूप में सम्मानित भी किया गया है। कोविड संक्रमण काल के दौरान जहां लोग अपने घरों से निकलने में डरते थे, वहीं, सरवर आलम अपनी जान की परवाह किए बिना पीड़ित मानवता की सेवा में दिन-रात लगे हुए थे।  मानवता के प्रति उनके समर्पण की  चहुंओर सराहना की जाती है। उनके साथ युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक सशक्त टीम है। जो समय-समय पर सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता निभाती है।

  सरवर आलम बताते हैं कि पीड़ित मानवता की सेवा करने से उन्हें सुखद अनुभूति होती है, सुकून मिलता है, जीवन का मकसद सार्थक होता है। वह अपने सहयोगियों सहित समाज के हर तबके के लोगों से अपील करते हुए कहते हैं कि अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा सा भी समय निकाल कर समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहें, तभी सामाजिक नवनिर्माण का सपना साकार होगा और हमारा समाज स्वस्थ व समृद्ध रहेगा।

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