कलाल इराकी, यंग इराकी झारखंड का ऐसा स्वागत की.......

 


जमीयतुल इराकीन और यंग इराकी झारखंड का कारवां आगे बढ़ रहा है

कलाल इराकी वेलफेयर सोसाइटी के कन्वीनर बने हाजी शकील, यंग इराकी के कन्वीनर बने एहतेशाम

(मुख्य संवाददाता मुफ्ती अहमद बिन नज़र)

रांची: राजधानी रांची से जमीअतुल इराकीन झारखंड और यंग इराकी झारखंड का एक डेलीगेट आज दिनांक 1 नवंबर 2022 दिन मंगलवार को जमशेदपुर पहुंचा। जहां उनका स्वागत कलाल इराकी वेलफेयर सोसाइटी जमशेदपुर ने होटल महल इन में गुलदस्ता देकर किया। इस विशेष बैठक में बतौर मुख्य अतिथि जामिया राशिदुल उलूम चतरा के शेखुल हदीस हजरत मौलाना मुफ्ती नजरे तौहीद, हज कमेटी के पूर्व प्रवक्ता खुर्शीद हसन रूमी, जमीअतुल इराकीन के कन्वीनर मौलाना मंजूर कासमी, यंग इराकी के कन्वीनर शाह उमैर, हाजी आरिफ, शुजा उद्दीन परवेज, क़ाज़ी उजैर, मास्टर मुस्ताक, जहीर आलम, सरवर आलम, शमीम अहमद, पत्रकार आदिल रशीद, आदि थे। 

विशेष बैठक को संबोधित करते हुए यंग इराकी झारखंड के कन्वीनर शाह उमैर ने कहां के आज हम एक दूसरे से दूर हो होते जा रहे है। जान कर भी हम एक दूसरे से अंजान बने रहते हैं। हमारे बिरादरी में चार लोग का स्टेटस ठीक हो गया तो हम कहते हैं पूरा समाज का स्टेटस ठीक हो गया ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। हम अपने लिए जिए तो क्या जिए, ए दिल तू जी जमाने के लिए। हमें इस पर काम करना है। आज कलाल बिरादरी मजदूरी का कार्य कर रहा है, पत्थर तोड़ने का काम कर रहे हैं। हमें ऐसे नीचे लोग के उत्थान और आने वाले नस्लों के लिए एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। 

 बैठक को संबोधित करते हुए शैखुल हदीस मुफ्ती नजरें तौहीद ने कहा कि आज कलाल बिरादरी बहुत ही पसंदा का शिकार है। bc2 में शामिल तो है, लेकिन इसे bc1 में शामिल होना चाहिए। इसका एक मकसद है की हमारे पास स्कूल कॉलेज अस्पताल हो। रांची से आए खुर्शीद हसन रूमी ने कहा कि कलाल बिरादरी पहचान की संकट से गुजर रहा है। इस को पहचान दिलाने के लिए काम किया जा रहा है, इसमें आप सबका सहयोग चाहिए। समाज को कैसे फायदा मिले इस पर सोच विचार क्या जा रहा है। हम आप सबसे अपील करते हैं कि अपने कामों में से थोड़ा सा वक्त निकाल कर समाज के लिए दे। ताकि इस बिरादरी की पहचान हो सके।

 वहीं मौलाना मंजूर कासमी इटकी ने कहा कि हमारी कोशिश पूरे झारखंड के कलाल बिरादरी एक साथ और एक चटाई पर अजाए। उन्होंने कहा कि हर इंसान जो दुनिया में बसता है किसी ना किसी कबीले से होता है। कलाल/ इराकी कबीले के लोगों को एक साथ बैठने और एक साथ 20 नवंबर को इटकी में आने का दावत देते हैं। देश जब आजाद हुआ तो संविधान बना और संविधान में रिजर्वेशन का प्रावधान आया। उसी रिजर्वेशन का फ़ायदा अपने बच्चो और आने वाले नस्लों को कैसे मिले इस पर काम करना है। इनके अलावा कई लोगों ने अपनी अपनी बात रखी। बैठक की अध्यक्षता हाजी वली साहब ने की और संचालन हाजी अब्बास अली ने किया।

 इसी बैठक में कलाल इराकी वेलफेयर सोसाइटी का विस्तार किया गया और यंग इराकी का गठन किया गया। सोसायटी के संरक्षक मोहम्मद मुख्तार, वली अहमद, मौलाना अब्दुल कलाम, और आसिफ महमूद हैं। इसी तरह कलाल इराकी वेलफेयर सोसाइटी के कन्वीनर हाजी शकील एशियन ट्रेबल्स, को-कनविनर डॉक्टर मो जफर, डॉक्टर शाहनवाज, मो इरशाद, मो इम्तियाज, खालिद महमूद, मो इमरान अली, मो साबिर को बनाया गया। 

साथ ही यंग कलाल इराकी वेलफेयर सोसाइटी के कन्वीनर एहतेशामुलहक़ शाहिद, को-कनविनर मो, इरशाद, अब्दुल हामिद, मो रिजवान, मो गुलाम को बनाया गया। बैठक की शुरुआत मौलाना एहतेशाम के तिलावत कुरान पाक से हुआ। मौके पर अब्दुल हादी, मुख्तार शफी मिस्टर भाई, डॉक्टर इफ्तेखार अहमद, नैय्यर रहमान, आरिफ अहमद, मो जहीर आलम, मंजर आलम, मो नसीम, मो जियाउल, गयासुद्दीन, सलीम, मो असलम, मो इमरान, मुख्तार अहमद, मौलाना एहतेशाम, मो रिजवान, मुजफ्फर आलम, मो रफीक, मो इरफान, मो साबिर, मो गुलाम, मो नौशाद आलम, मो रेहान, मो सलीम समेत सैंकड़ों लोग थे।

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